Geography Notes in Hindi – राजस्थान में सहकारिता आन्दोलन

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Geography Notes in Hindi

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सहकारिता आन्दोलन एक ऐसा संगठन है जो समस्याओ का सामूहिक और प्रभावशाली ढंग से समाधान करता है।
राजस्थान में सहकारिता का शुभारम्भ 1904 ई. को अजमेर से हुआ था।
राज्य में प्रथम सहकारी समिति 1905 भिनास, अजमेर में स्थापित की गई थी।
राजस्थान में सहकारी संगठन का स्वरुप
इसके तीन भाग है।
शीर्ष बैंक या प्रांतीय सहकारी बैंक (राज्य की सर्वाच्च सहकारी संस्था)
केन्द्रिय सहकारी बैंक (प्रत्येक जिले में एक)
प्रारम्भिक सहकारी सारव समितियां
इसके दो भाग है-
ग्रामीण प्रारम्भिक (सहकारी सारव समिति)
शहरी प्रारम्भिक (सहकारी सारव समिति)
1955 ई. में प्रथम बार राजस्थान सहकारी समिति विधि पारित किया गया था।
1957 ई. में राज्य सहकारी संघ की स्थापना की।
सहकारी सारव व्यवस्था का ऋण वितरण का ढांचा त्रिस्तरीय है-
1. अल्प 2. मध्य 3. दीर्धकालीन
सहकारिता की प्रमुख योजना व समिति के लिए 1984 में क्रेफी कार्ड (मिनी बैंक) की स्थापना की गई थी।
एक ही स्थान पर सभी प्रकार के ऋणों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए शिवमरण कमेठी की सिफारिश के आधार पर इसका गठन किया गया।
सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड सहकरिता क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड वितरण करने वाला राजस्थान प्रथम राज्य है तथा पहला क्रेडिट कार्ड 29 जनवरी 1999 को रामनिवास यादव (गांव सिरसी) को दिया गया था।
राजफैड– यह राज्य की प्रथम प्राथमिक क्रय-विक्रय सहकारी संस्था है।
राज्य में सहकारी आन्दोलन की शुरूआत 1919 ई. में अजमेर के रेलवे कर्मचारियों द्वारा की गई थी।
राजस्थान में सहकारी शीत भण्डार जयपुर व अलवर में है।
सहकारी कताई मील (1972) गुलाबपुरा राज्य की पहली कताई मील है।
राज्य की एक मात्र सहकारी क्षेत्र की चीनी मील 1965 में केशोराय पाटक बूंदी में है।
सहकारी ध्वज में सात रंग होते है।
राज्य में पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था है।
ग्राम स्तर ग्राम पंचायत
खण्ड स्तर पंचायत समिति
जिला स्तर जिला परिषद्
राजफैड (26 नवम्बर 1957) शीर्ष संस्था है।
राजसीको (3 जून 1961) लघु संस्था है।
रीको- (जनवरी 1980) – राज्य में औद्योगिक विकास की संस्था व वृहद उद्योगों को ऋण उपलब्ध करवाती है।
 

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