History of Marwar – मारवाड़ का इतिहास

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History of Marwar

History of Marwar, Marwad ka Itihas नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है Sarkari Result Kart पर। आज की Post मारवाड़ के इतिहास से सम्बन्धित है इस Post में राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के प्रतापी शासको के बारें बताया गया है जिन्होंने अपने धर्म और आत्म-सम्मान को सर्वोपरि रखा। यह Post Rajasthan Patwar, Police, Railway और बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में आपकी help करेगी।
राजस्थान की प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में History of Marwar से related कुछ प्रश्न पूछ लिये जाते है जो आपके लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते है। जो अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है वे इसे एक बार ध्यान से जरूर पढ़े। अगर आपको Marwad ka Itihas Post की pdf download करनी है तो article के last में link पर जाकर प्राप्त कर सकते है।

History of Marwar – मारवाड़ का इतिहास

  • मारवाड़ के राठौड़ वंश की स्थापना राव सीहा ने 13वीं शताब्दी में की
  • राठौड़ों का प्रथम बड़ा शासक चूड़ा हुआ जो वीरमदेव का पुत्र था।
  • चूड़ा के उत्तराधिकारी राव रणमल ने अपनी बहिन का विवाह मेवाड़ के शासक राणा लाखा के साथ करवाया।

राव जोधा (1438-1489 ई.)-

  • रणमल का उत्तराधिकारी उसका पुत्र राव जोधा बना।
  • राव जोधा ने अपनी पुत्री का विवाह कुम्भा के पुत्र रायमल से करवाया।
  • राव जोधा ने 1459 में अपनी राजधानी जोधपुर में स्थापित की।
  • राव जोधा ने मयूर ध्वजगढ का निर्माण करवाया जो बाद में मेहरानगढ़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • जोधा के उत्तराधिकारी- राव सातल (1482-92 ई.) तथा राव सूजा (1492-1515 ई.)।

राव गांगा (1515-1531 ई.)-

  • राव सूजा की मृत्यु के पश्चात् उसका पौत्र गांगा मारवाड का शासक बना।
  • 1531 ई में राव गांगा की हत्या उसके ज्येष्ठ पुत्र मालदेव ने कर दी।

यदि आपको राजस्थान के इतिहास से सम्बन्धित और भी article पढ़ने है तो दिये गये link पर click करके पढ़ सकते है Rajasthan ke Rajvansh, Praja Mandal Movement in Rajasthan, Rajasthan Me Kisan Andolan, Freedom Fighter of Rajasthan, 1857 Revolution in Rajasthan, History of India

मालदेव (1531-1562 ई.)-

  • मारवाड़ के इतिहास में इसका उतना ही महत्वपूर्ण योगदान है जितना मेवाड़ में सांगा व प्रताप का था।
  • मालदेव को फारसी इतिहासकारो ने हशमतवाला शासक कहा है जिसका शाब्दिक अर्थ शक्तिशाली है।
  • मालदेव ने रावल लूणकरण की पुत्री उमादे से विवाह किया।
  • उमादे को रूठी रानी के नाम से जाना जाता है।
  • 1544 ई. में शेरशाह ने मालदेव पर आक्रमण किया।
  • शेरशाह इस युद्ध में विजयी रहा पर यह कहने को बाध्य हो गया कि एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए मे हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता।

राव चन्द्रसेन (1562-1581 ई.)-

  • मालदेव की मृत्यु के बाद उसका तीसरा पुत्र चन्द्रसेन मारवाड़ का शासक बना।
  • 1570 ई. में अकबर ने हुसैन कुली खाँ के नेतृत्व में मारवाड़ पर आक्रमण किया।
  • चन्द्रसेन ने जीवन भर मुगलों से संघर्ष किया।
  • चन्द्रसेन को मारवाड़ का भूला बिसरा राजा, मारवाड़ का प्रताप तथा प्रताप का अग्रगामी कहा जाता है।

उदयसिंह (1583-1597 ई.)-

  • 1583 ई. को अकबर ने चन्द्रसेन के भाई उदयसिंह को मारवाड़ का शासक बनाया।
  • उदयसिंह मारवाड़ का प्रथम शासक था जिसको मुगलों की कृपा प्राप्त थी।
  • 1587 ई. में मोटा राजा उदयसिंह ने अपनी पुत्री जगत गोसाई बाई का विवाह शाहजादे सलीम (जहाँगीर) के साथ किया।

महाराजा शूरसिंह (1595-1619 ई.)-

  • उदयसिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र शूरसिंह उत्तराधिकारी बना।
  • 1613 ई. में शूरसिंह ने मेवाड़ अभियान में खुर्रम का साथ दिया।

जसवन्त सिंह प्रथम (1638-1678 ई.)-

  • जसवंत सिंह ने मुगलों की ओर से शिवाजी के विरुद्ध अभियान में भाग लिया।
  • शाहजहाँ ने उन्हें महाराज की उपाधि से सम्मानित किया।
  • धरमत का युद्ध (उज्जैन)- औरंगजेब व दाराशिकोह के मध्य उत्तराधिकारी के लिए।

अजीत सिंह (1679-1724 ई.)-

  • जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद अजीत सिंह उत्तराधिकारी बना।
  • अजीतसिंह एक उच्च कोटि का विद्वान, कवि व लेखक था।
  • अजीतसिंह ने अपनी पुत्री इन्द्रकुमारी का विवाह फर्रूखशियर से किया था यह अंतिम मुगल राजपूत विवाह था।

महाराजा मानसिंह (1803-1843 ई.)-

  • 1803 ई. में उत्तराधिकारी युद्ध के बाद मानसिंह जोधपुर के सिंहासन पर बैठा।
  • भारत के आजादी के समय जोधपुर के शासक हनुवन्त सिंह थे।

वीर दुर्गादास-

  • दुर्गादास के पिता आसकरण थे जो द्रुनेरा का जागीरदार थे।
  • दुर्गादास ने औरंगजेब की कैद से अजीत सिंह को बाघेली नामक महिला की मदद से छुडवाया।
  • बाघेली महिला को ही रूपाधाय, गौराधाय तथा मारवाड़ की पन्ना कहा जाता है।

 

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